Press Release

AICCTU congratulates and salutes the workers of Steel sector for making a big success of the one day strike today (June 30) in all plants, as well as in related mining areas, throughout the country demanding conclusion of long pending wage revision and withdrawal of the policy of disinvestment and privatisation in steel sector. The strike was 80 to 100 % successful, with young and new workers taking a leading role in organising the strike
The Central Trade Unions to observe June 26th across the Nation In solidarity with Samyukta Kisan Morcha as a "Save Agriculture-Save Democracy" Day 15 June 2021 On 14th June, 2021, the Farmers' agitation, led by Samyukta Kisan Morcha completed 200 days of continuous protest on and occupation of main highways leading into national capital Delhi, for their demands to repeal three farm laws, taking back the Electricity (Amendment) Ordnance, 2021 and legal guarantee for the
ऐक्टू ने दिल्ली के विभिन्न इलाकों में भूख-हड़ताली डॉक्टरों और एमसीडी कर्मचारियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए किया प्रदर्शन नई दिल्ली: ऐक्टू व दिल्ली की विभिन्न ट्रेड यूनियन संगठनों ने आज हिन्दू राव अस्पताल के भूख हड़ताली डॉक्टरों व अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के साथ प्रदर्शन-स्थल पर जाकर, अपनी एकजुटता जाहिर की. ऐक्टू से जुड़े विभिन्न क्षेत्र के मजदूर साथियों ने भी आज डॉक्टरों और एमसीडी कर्मचारियों के समर्थन में दिल्ल
शनिवार को ऐक्टू के दिल्ली राज्य सचिव कामरेड सूर्य प्रकाश व अन्य साथी, दिल्ली के हिन्दू राव अस्पताल के डॉक्टरों से मिले और ऐक्टू की ओर से एकजुटता जाहिर की. आज उनके भूख हड़ताल का दूसरा दिन था - देश की राजधानी में केंद्र व दिल्ली सरकार के पास डॉक्टरों को देने के लिए पैसे नही है ! चार महीने से डॉक्टरों को सैलरी नही आई जिसके कारण वो भूख-हड़ताल करने के लिए मजबूर हैं
सेंटर ऑफ़ स्टील वर्कर्स (ऐक्टू) ने गांधी चौक सेक्टर चार में एक दिवसीय धरने का आयोजन किया जिसकी अध्यक्षता एस एन प्रसाद ने किया. सेंटर ऑफ़ स्टील वर्कर्स ने इस एक दिवसीय आयोजित धरने के ज़रिये इस्पात कर्मियों को इस पार फिर बोनस के अदायगी नहीं होने का विरोध करते हुए एतराज़ जताया. यूनियन के महामंत्री देव दीप सिंह दिवाकर ने कहा कि सेंटर ऑफ स्टील वर्कर्स शुरु से ठेका कर्मियों को इस्पात मज़दूर घोषित
आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) ने दिल्ली के लगभग पचास अलग-अलग इलाकों में शहीदे आजम भगत सिंह की जयंती पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया. प्रदर्शन में विभिन्न इलाकों और ‘लेबर चौकों’ पर सांप्रदायिकता के विरुद्ध पर्चे भी बांटे. कार्यक्रम का आयोजन उत्तरी दिल्ली के नरेला, सरूप नगर, संत नगर, नत्थूपुरा, वजीराबाद, जहांगीरपुरी, जीटीबी नगर, वजीरपुर; दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के संगम विहार, देवली, कुसुमपुर, ओखला, नजफगढ़; पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा, करावल नगर
आज़ाद देश में बनाया जा रहा है हमें गुलाम – निजीकरण और श्रम कानूनों के खात्मे से मजदूरों की हालत और खराब हो जाएगी नई दिल्ली : ऐक्टू से सम्बद्ध ‘डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर’ ने आज इन्द्रप्रस्थ स्थित डीटीसी मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें डीटीसी में कार्यरत कर्मचारियों ने हिस्सा लिया. दिल्ली समेत देश के अनेक हिस्सों में मोदी सरकार द्वारा लाए जा रहे श्रमिक-विरोधी कानूनों का जमकर विरोध हो रहा है. डीटीसी कर्मचारियों
मोदी सरकार को इस त्रासदी और प्रवासी मजदूरों की बिगड़ती हालत की जिम्मेदारी लेते हुए देश से माफी मांगनी चाहिए. ऐक्टू सभी प्रवासी मजदूरों की अपने गृह राज्यों को मुफ्त ट्रेनों से तत्काल वापसी की पुनः मांग करता है. ऐक्टू इस भयानक त्रासदी पर गहरा आक्रोश और रेल दुर्घटना में हुई प्रवासी मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करता है. यह भयानक त्रासदी आज अल्ल-सुबह उस वक्त हुई जब मजबूरी में पैदल ही अपने
ऐक्टू आज केन्द्रीय श्रम मंत्री के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर श्रम मंत्रालय की प्रतिक्रिया और दृष्टिकोण की कड़ी निंदा करता है. इस बैठक में यूनियनों ने कोविड-19 लॉकडाउन के 45 दिनों के दौरान उभरे मजदूरों से जुड़े हुए मुद्दों को उठाया था. यूनियनों ने इस बात की तरफ ध्यान दिलाया कि श्रम मंत्रालय ने लॉकडाउन वेतन देने और छंटनी ना होने, वेतन ना
कोविड-19 द्वारा पैदा किये गए व्यापक आर्थिक संकट का बोझ मजदूरों के कंधों पर डालने की मोदी सरकार कर रही है तैयारी हमें मालूम हुआ है कि वरिष्ठ नौकरशाहों के एक अधिकार-संपन्न समूह ने कोरोना वायरस लॉकडाउन के मद्देनजर जारी आर्थिक संकट से पार पाने के लिये काम के घंटों को बढ़ाकर 12 घंटे के कार्य दिवस का प्रस्ताव दिया है. इस प्रस्ताव को फैक्टरी ऐक्ट 1948 में संशोधन कर अंजाम दिया जाएगा. यह प्रस्ताव