संपादकीय

26 जनवरी 2018, सन् 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री पद पर बैठने के बाद से चैथा गणतंत्र दिवस है. इस मोदी शासनकाल के दौरान आये हर गणतंत्र दिवस ने हमको अपने धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणतंत्र की संवैधानिक आधारशिला पर बढ़ते फासीवादी हमले के बारे में तीव्रता से अवगत कराया है. जब यह शासन अपनी अवधि के अंतिम चरण में पहुंच रहा है, तब संविधान पर, उसकी संरचना और कार्य-पद्धति, दोनों लिहाज से हमले केवल तीखे होते जा रहे हैं.

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