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मिथिलांचल के कम्युनिष्ट आंदोलन के बड़े योद्धा माकपा के पूर्व राज्य सचिव विजय कान्त ठाकुर का आज अहले सुबह देहांत हो गया।अंतिम दर्शन के लिए जा रहा हूँ।उम्र के इस पड़ाव पर भी वे सक्रिय थे।पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। सोशलिस्ट पार्टी
22 जुलाई 2018 को ऐक्टू की जम्मू एवं कश्मीर इकाई की स्थापना हुई. इस संबंध में हुई बैठक का उद्घाटन फेडरेशन ऑफ यूनियनस् ऑफ इंडस्ट्रीयल वर्कर्स (एफयूआईडब्लू) के अध्यक्ष और भाकपा-माले के राज्य सचिव निर्दोष उप्पल ने किया. बैठक में फेडरेशन से जुड़ी तमाम ट्रेड
मोदी सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) द्वारा गठित ‘शक्ति-प्रदत्त विशेषज्ञ समिति (ईईसी) की ओर से अभी तक अस्तित्व-हीन जियो इंस्टीट्यूट ऑफ रिलायंस फाउंडेशन को ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ (उत्कृष्ट संस्थान - आइओई) का तमगा प्रदान करने का फैसला खुल्लमखुल्ला क्रोनीवाद (पिट्ठू या भाई-भतीजावाद) को
भारत औपनिवेशिक अवधि में अनेकानेक दंगों और जनसंहारों का गवाह रहा है और इसने उपनिवेशोत्तर काल में भी ढेरों जन-हत्याओं और राज्य के सशस्त्र बलों के द्वारा गैर-न्यायिक एनकाउंटरों को भी देखा है; लेकिन ‘लिंचिंग’ के नाम से जिस किस्म की प्रायोजित भीड़ हिंसा चल
भारतीय ट्रेड यूनियन आंदोलन, विशेषकर डाक कर्मचारियों के संघर्ष के इतिहास में, ग्रामीण डाक सेवकों की 22 मई 2018 से प्रारम्भ हुई 16 दिवसीय हड़ताल कई मायनों में विलक्षण और अद्वितीय रही. यों तो इससे लम्बी हड़तालों का इतिहास है. 1945 में डाक विभाग के
ऐक्टू समेत दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (बीएमएस छोड़कर) ने सामाजिक सुरक्षा कोड पर सरकार द्वारा बुलाई गई जोनल स्तर की बैठकों का संयुक्त रूप से बहिष्कार किया. सामाजिक सुरक्षा कोड पर मोदी सरकार के श्रम मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठकों का यह तीसरा दौर है

संपादकीय

20 जुलाई को मोदी सरकार ने पहली बार संसद में अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का सामना किया. यद्यपि सरकार ने मतदान में अच्छे-खासे बहुमत से विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को हरा दिया, फिर भी बहस के दौरान सरकार बुरी तरह से बेनकाब हो गई. यहां तक कि मतदान के पैटर्न ने मोदी सरकार के लिये शक्तियों के एक प्रतिकूल पुनर्संयोजन का इशारा दिया. अविश्वास प्रस्ताव तेलगू देशम पार्टी की ओर से पेश किया गया था

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