250रू. प्रतिमाह वृद्धि की सरकारी घोषणा के बाद बिहार में मिड-डे मील कर्मियों ने अपनी हड़ताल स्थगित की

बिहार सरकार द्वारा मिड-डे मील कर्मियों का मानदेय 1250रू. से बढ़ाकर 1500रू. करने और तमाम दंडात्मक आदेश वापस लेने की घोषणा के बाद ऐक्टू से संबद्ध बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ और सीटू, एटक एवं आईयूटीयूसी से जुड़ी मिड-डे मील कर्मी यूनियनों के संयुक्त मोर्चे ने न्यूनतम मजदूरी, नियमितीकरण समेत 15 सूत्री मांगपत्र पर 7 जनवरी से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल को 16 फरवरी को वापस ले लिया. बिहार में करीब ढाई लाख रसोईया कार्यरत हैं. संयुक्त मोर्चा ने साथ ही, 18000रू. न्यूनतम मजदूरी और अन्य सवालों पर आंदोलन जारी रखने की घोषणा की.

हड़ताल के क्रम में रसोइयों ने तरह-तरह से आंदोलन किये; प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक का पुतला दहन किया और मुख्यमंत्री का घेराव करने से लेकर बिहार का चक्का जाम किया. आंदोलन को शिक्षकों समेत पूरे समाज का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ. खासकर बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) और भाकपा-माले के विधायकों ने इस आंदोलन को भरपूर सहयोग देते हुए सरकार पर दबाव बनाया.

लेकिन केंद्र सरकार ने देशभर के रसोइयों के मानदेय में अपने हिस्से की अब तक बढ़ोतरी नहीं की है, जबकि वह दो बार मिड-डे मील कर्मियों की यूनियनों के प्रतिनिधिमंडल को मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दे चुकी है. केंद्र पोषित इस योजना में बिहार के रसोईयों को अब मिलने वाले कुल 1500रु. मानदेय में केंद्र का हिस्सा बहुत छोटा सिर्फ 600रू. रह गया है. मूल 1000रू. मानदेय जिसमें 60 प्रतिशत के अनुसार केंद्र का 600रू. व राज्य का 40 प्रतिशत की दर से 400रु. के बाद अतिरिक्त 500रु. जो राज्य सरकार देगी इस राशि का 60 प्रतिशत मूल्य 750रू. अतिरिक्त राशि केंद्र सरकार को देनी है. यदि केंद्र सरकार अपना हिस्सा 750रू. देती है तो राज्य में रसोईयों का मानदेय बढ़कर कुल 2250रू. हो सकता है.

इसलिये रसोईयों को सीढ़ी दर सीढ़ी जीत दर्ज करने और अपनी मांगों को हासिल करने के लिये आगे और भी बड़ी लड़ाई की तैयारी में लग जाना होगा.

मिड-डे मील कर्मियों की हड़ताल
वर्षः 13
अंकः 12