Coal Sector

Coal Mines Workers Union (CMWU)

कोयला लोडिंग मजदूरों का लाठी मार्च

रामगढ़ जिला में सीसीएल के अंतर्गत सिरका लोकल सेल में हाथ से कोयला लोडिंग बंद कर दिये जाने और पेलोडर से कोयला लोड की शुरूआत के विरोध में 500 लोडिंग मजदूरों ने 5 अक्टूबर को सिरका परियोजना पदाधिकारी के समक्ष आक्रोशपूर्ण लाठी मार्च किया और मजदूरों की मजदूरी की लूट तथा मजदूरों को बेरोजगार बनाने के खिलाफ आवाज उठाई.

हजारीबाग एरिया की कोलियरी में हुई दुर्घटना की जांच के लिये गई सीएमडब्लूयू की जांच टीम

सीसीएल के हजारीबाग एरिया स्थित नार्थ तापिन कोलियरी में 21 जुलाई 2018 को हुई दुर्घटना की जांच के लिये ऐक्टू से संबद्ध कोल माइंस वर्कर्स यूनियन की एक तीन-सदस्यीय जांच टीम ने केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य जगरनाथ उरांव की अगुवाई में दुर्घटना स्थल का दौरा किया और घायलों एवं मारे गए मजदूरों के परिजनों से मुलाकात की. जांच टीम के अन्य सदस्य थे - कुजू एरिया के सचिव महादेव मांझी एवं केंद्रीय कमेटी सदस्य शिव शंकर उरांव. इस हादसे में चार कोयला श्रमिकों की मौत हो गई और चार श्रमिक घायल हुए.

मजदूर-विरोधी, जन-विरोधी फासीवादी मोदी सरकार को हटाने के संकल्प के साथ मई दिवस के अवसर पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किये गये

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर देश भर में ऐक्टू और भाकपा-माले ने रैलियों, जुलूस और सभाओं के रूप में विविध आयोजन किए और मजदूर-विरोधी, जन-विरोधी व राष्ट्र-विरोधी फासीवादी संघ-भाजपा निजाम को शिकस्त देने का संकल्प लिया. पिछले अंक में समय की कमी के चलते हम इनकी रिपोर्ट नहीं दे सके. इस अंक में प्रस्तुत है मई दिवस कार्यक्रमों की सक्षिप्त में रिपोर्ट.

सीएमडब्लूयू ने कमर्शियल माइनिंग के सरकारी निर्णय के खिलाफ 16 अप्रैल को प्रतिवाद दिवस मनाया

1971 में कोकिंग कोल और 1972 में नॉन कोकिगं कोल का राष्ट्रीयकरण हुआ था. उस समय कोयला उत्खनन और विक्रय पर कोल इंडिया का एकाघिकार था और उस समय कुछ कैप्टिव माइन्स भी थीं. कुछ खदानें जरूरत के हिसाब से कुछ कम्पनियों के पास थीं पर उन्हें कोयला बेचने का अधिकार नहीं था. उत्पादित कोल को वे अपने स्टील प्लांट व पावर प्लांट में उपयोग करत थे. यूपीए सरकार के समय से आउटसोर्सिंग की नीति लायी गयी जो सिर्फ उत्पादन में थी, लेकिन बेचने का काम कोल इंडिया करती थी. आउटसोर्सिंग कम्पनियां शुरुआती दौर में कोयला उत्पादन नहीं करती थीं, वो सिर्फ मिट्टी-पत्थर निकलती थी.

Mining Workers’ Protest in Odisha

On 19 December, nearly three hundred mining workers came together to protest in front of Odisha Assembly. The workers had a six-point demands that included opening the Kalarangi mining soon; release of gratuity money of the workers; EPF provisions; linking pension funds with provident fund office; proper utilisation of District mineral development fund in mining affected villages; and others. Com. Radhakant Sethi, state General Secretary of AICCTU, Com. Mahendra Parida, National secretary of AICCTU, and Com.