ASHA

Asha Workers

Accredited social health activists (ASHAs) is community health workers instituted by the government of India's Ministry of Health and Family Welfare (MoHFW) as part of the National Rural Health Mission (NRHM). The mission began in 2005.......

बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ का तीसरा सम्मेलन

आशा को सरकारी कर्मी का दर्जा दो, 18000 मानदेय लागू करो के नारों के साथ ऐक्टू और कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) से संबद्ध ‘बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ’ का तीसरा राज्य सम्मेलन पटना में 3 नवंबर ’18 को संपन्न हुआ. सम्मेलन ने आशा सहित सभी स्कीम वर्करों को आधुनिक गुलाम बनाने वाली मोदी- नितीश सरकार को आगामी चुनाव में धूल चटाने, 1 दिसंबर से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल से मोदी-नितीश के खिलाफ आर-पार की लड़ाई शुरू करने तथा 8-9 जनवरी ’19 को देशव्यापी दो दिवसीय आम हड़ताल को सफल बनाने का आहृान किया.

सफल रही बिहार में रसोइयों की पांच दिवसीय हड़ताल

19 नवंबर को संसद के समक्ष संयुक्त प्रदर्शन को सफल करने का आहृान

‘बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ’ (संबद्ध ऐक्टू) के नेतृत्व में पांच दिवसीय हड़ताल (5-9 अक्टूबर 2018) को जबरदस्त सफलता मिली. स्वतःस्फूर्त रूप से रसोइयों ने इसमें भागीदारी की. हड़ताल की मुख्य मांगें थीं - रसोइयों को सरकारी कर्मचारी घोषित करो, जब तक सरकारी कर्मचारी घोषित नहीं होती हैं मानदेय 18000 रुपये करो; रसोइयों को बिहार सरकार की चौधरी कमेटी की सिफारिशों का लाभ दो; ईपीएपफ-ईएसआई का लाभ दो; पूरे साल के मानदेय का भुगतान किया जाए, मानदेय का भुगतान नियमित किया जाए; उन्हें पार्ट-टाइम वर्कर न कहा जाए आदि.

उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन का जुझारू प्रदर्शन

ऐक्टू से संबद्ध ‘उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन’ ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा ‘‘आशाओं के साथ बात’’ कार्यक्रम के बाद की गई धोखाधड़ी भरी घोषणा के विरुद्ध 14 सितम्बर 2018 को राज्यव्यापी विरोध कार्यक्रम के तहत नैनीताल, रुद्रपुर, पिथौरागढ़, रानीखेत, भिकियासैंण, लोहाघाट, रामनगर, टनकपुर आदि अनेक स्थानों पर धरना-प्रदर्शन-जुलूस निकालकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा.

उत्तराखंड में आशा कर्मियों का विभिन्न ब्लाॅकों में प्रदर्शन

उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स  यूनियन (संबद्ध-ऐक्टू) द्वारा अपनी मांगों के लिये अगस्त माह में राज्य के विभिन्न ब्लॉकों में प्रदर्शन किया गया और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया. यूनियन नेताओं ने कहा कि, आशाओं को मातृ, शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए भर्ती किया गया था. सरकारी आंकड़े गवाह हैं कि आशाओं के आने के बाद सभी क्षेत्रों में मातृ शिशु मृत्यु दर में भारी कमी आयी है और जच्चा बच्चा स्वास्थ्य भी बेहतर हुआ है परंतु आशाएं अब भी न्यूनतम मासिक वेतन से वंचित हैं.

बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ ने 16 अगस्त को दर्जनों प्राइमरी हेल्थ केंद्रों पर पुतला दहन किया

बिहार में आशाओं के सम्मान और पहचान को लेकर बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ (संबद्ध ऐक्टू) के तहत कई लड़ाइयां लड़ी गयी हैं. आशा विश्राम गृह के मामले में जीत भी मिली है. डॉक्टरों के जरिये नौकर जैसा व्यवहार होता था उसपर रोक लगी है. अभी हाल ही में रोहतास ज़िला के तिलौथू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर ने 10 अगस्त की रात्रि ड्यूटी पर आई आशा के साथ शराब पी कर दुर्व्यवहार किया था. शिकायत करने पर वह फिर आशाओं के साथ बदतमीजी करने लगा. इसके खिलाफ आशाओं ने कार्य के बहिष्कार के साथ काम ठप कर दिया और धरने पर बैठ गईं.

उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के ब्लाक सम्मेलन

ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखण्ड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट और ताड़ीखेत-रानीखेत के ब्लॉक सम्मेलन सम्पन्न हुए. इनमें ऐक्टू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजा बहुगुणा मुख्य वक्ता रहे. सम्मेलनों में नई ब्लॉक कार्यकारिणियों व पदाधिकारियों का चुनाव किया गया. आशा संगठन को ब्लॉक स्तर पर मजबूत करने का यह अभियान जारी रहेगा. जुलाई माह के अंत तक आशा यूनियन के सभी ब्लॉक सम्मेलन करते हुए यूनियन को मजबूत करने का लक्ष्य पूरा किया जायेगा. ु

 

दिल्ली आशा कामगार यूनियन का प्रदर्शन

‘मानदेय में दम नहीं, न्यूनतम वेतन से कम नहीं’; ‘पक्की नौकरी, पूरा वेतन, हक और सम्मान’; सभी आशा कर्मियों को न्यूनतम वेतन के अनुरूप वेतन दिया जाए; आशा कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए; दिल्ली की सभी बसों में आशाओं के लिए फ्री बस पास की सुविधा हो - इन नारों और मांगो के साथ दिल्ली आशा कामगार यूनियन (संबद्ध ऐक्टू) द्वारा 5 जून 2018 को मुख्यमंत्री आवास पर धरना प्रदर्शन किया गया. इसमें विभिन्न इलाकों से आशा वर्कर्स ने हिस्सा लिया और अपनी मांगे बुलंद की.

दिल्ली आशा कामगार यूनियन ने विधयकों को ज्ञापन सौंपे

ऐक्टू से संबद्ध ‘‘दिल्ली आशा कामगार यूनियन’’ आशा कर्मियों के अधिकारों को लेकर निरंतर संघर्षरत है. अपने संघर्ष के मौजूदा चरण में यूनियन दिल्ली विधान सभा के सभी विधायकों से मिलकर उन्हें आशा कर्मियों की मांगों को लेकर ज्ञापन दे रही है. ज्ञापन में मांग की गई है कि वे विधानसभा में इस प्रस्ताव को लेकर आयें कि आशा कर्मियों को न्यूनतम वेतन के बराबर वेतन दिया जाए, उनको सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और, चूंकि आशा कर्मियों के अधिकतर कार्य फील्ड संबंधी है, अतः उन्हें डीटीसी की बसों में बस पास की सुविधा दी जाए.

मजदूर-विरोधी, जन-विरोधी फासीवादी मोदी सरकार को हटाने के संकल्प के साथ मई दिवस के अवसर पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किये गये

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर देश भर में ऐक्टू और भाकपा-माले ने रैलियों, जुलूस और सभाओं के रूप में विविध आयोजन किए और मजदूर-विरोधी, जन-विरोधी व राष्ट्र-विरोधी फासीवादी संघ-भाजपा निजाम को शिकस्त देने का संकल्प लिया. पिछले अंक में समय की कमी के चलते हम इनकी रिपोर्ट नहीं दे सके. इस अंक में प्रस्तुत है मई दिवस कार्यक्रमों की सक्षिप्त में रिपोर्ट.

बिहार में स्कीम कर्मियों का ऐक्टू के नेतृत्व में निरंतर संघर्ष

विद्यालय रसोईया

10 अप्रैल को चम्पारन सत्याग्रह शताब्दी समापन समारोह में शामिल होने आ रहे प्रधानमंत्री को अपनी मांगों से सम्बंधित ज्ञापन सौंपने के लिए ऐक्टू से संबद्ध ‘‘बिहार राज्य विद्यालय रसोईया संघ’’ के आहृान पर हजारों की तादाद में, पुलिस प्रशासनिक आतंक को धता बताते हुए, विद्यालय रसोईया (मिड-डे मील योजना के तहत नियोजित कर्मी) मोतीहारी की सड़कों पर उतर आये. विदित हो कि रसोईया संघ ने अपने आंदोलनों के माध्यम से चम्पारन सत्याग्रह शताब्दी वर्ष का समापन किया.