धरना-प्रदर्शन-प्रतिरोध

पटना के कंकड़बाग फुटपाथ दुकानदारों का निगम कार्यालय के समक्ष धरना

40 से अधिक वर्षों से कंकड़बाग टेम्पो स्टैंड के निकट फुटपाथ पर कारोबार कर रहे यहां के सब्जी मार्केट एवं फुटपाथ दुकानदारों को अतिक्रमण के नाम पर नगर निगम द्वारा बार-बार उजाड़ दिए जाने तथा सम्पतियों को नष्ट कर देने से आक्रोशित सैकड़ों सब्जी विक्रेताओं व फुटपाथ दुकानदारों ने 6 दिसंबर 2018 को विरोध में तथा सभी दुकानदारों को स्थायी मार्केट बना कर देने की मांग पर  कंकड़बाग टेंपो स्टैंड पर नगर निगम कार्यालय के मुख्य गेट के पास धरना दिया.

लखनऊ में ऐक्टू का प्रदर्शन

बैटरी चालित रिक्शा (ई-रिक्शा) चालकों के उत्पीड़न एवं रेहड़ी पटरी दुकानदारों को उजाड़े जाने के विरोध में 28 दिसम्बर 2018 को ऐक्टू ने परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाल कर प्रदर्शन किया और राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा. ज्ञापन में ई-रिक्शा चालकों का उत्पीड़न बन्द करने, उनके लिये रुट तय किये करने व स्टैंड बनाने और पटरी दुकानदारों को उजाड़ना बन्द करके उन्हें रोजगार की सुरक्षा देने की मांग की गई.

बिहार में विद्यालय रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

बिहार में आशाकर्मियों के आंदोलन के सफल समापन के तुरंत बाद सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना से जुड़ी रसोइयों की जोरदार अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो चुकी है. ऐक्टू से संबद्ध बिहार राज्य विद्यालय रसोईया संघ के साथ ही एटक, सीटू और एआईयूटीयूसी से संबद्ध- इन चार संघों के संयुक्त बैनर पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरूआत हो चुकी है. 7 जनवरी से शुरू हुई इस हड़ताल में रसोईयों का पारिश्रमिक तुरंत बढ़ाने और उनका न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये करने की मुख्य मांग समेत कुल 14 मांगें शामिल हैं. इससे पूर्व बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ के नेतृत्व में पांच दिवसीय हड़ताल (5-9 अक्टूबर 2018) हुई थी.

बिहार में आशा कर्मियों के ऐतिहासिक आंदोलन की शानदार जीत

आखिरकार बिहार में आशा कर्मियों के ऐतिहासिक आंदोलन ने राज्य की नीतीश कुमार सरकार को झुका दिया. आशा कर्मी पहली दिसंबर 2018 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर उतर गई थी. यह आंदोलन ‘‘आशा संयुक्त संघर्ष मंच’’ के नेतृत्व में चल रहा था. सरकार ने पहली जनवरी 2019 से एक हज़ार रु. मासिक मानदेय लागू करने सहित सभी 12 सूत्री मांगों को मान लिया जिसकी घोषणा सरकार ने 7 जनवरी को की. सरकार की इस घोषणा के बावजूद आशा कर्मियों ने अगले ही दिन पूरी ताकत के साथ 8-9 जनवरी की देशव्यापी आम हड़ताल में शिरकत की और एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया.

ऐक्टू ने हड़ताल को सफल बनाने में निभाई अग्रणी भूमिका

झारखंड:

Jharkhand Nirman Mazdoor-union
झारखंड निर्माण मजदूर यूनियन

8-9 जनवरी के दो दिवसीय हड़ताल के दौरान ईसीएल, बीसीसीएल, सीसीएल समेत पूरे कोयला उद्योग में संपूर्ण हड़ताल रही जो कि मुख्यतः वाम यूनियनों के नेतृत्व में आयोजित थी. कोयला उत्पादन, ढुलाई व डिस्पैच पूरी तरह बंद रहा.

मजदूरों की दो दिवसीय ऐतिहासिक हड़ताल

ऐक्टू समेत देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मिलकर 8-9 जनवरी 2019 को देशव्यापी हड़ताल का आहृान किया था. यह आहृान 28 सितंबर 2018 को दिल्ली में आयोजित मजदूर सम्मेलन में भाजपा नीत एनडीए सरकार की मजदूर-विरोधी, जन-विरोधी और देश-विरोधी नीतियों के खिलाफ किया गया था. भाजपा सरकार ट्रेड यूनियनों से कोई अर्थपूर्ण चर्चा नहीं कर रही थी और उसी वक्त मालिकों के पक्ष में एक के बाद एक निर्णय कर रही थी. इससे कामगार जनता की हालत असहनीय हो गई है.

लखनऊ में हजारों ग्राम प्रहरियों ने भरी हुंकार

उ.प्र. ग्राम प्रहरी (चौकीदार) यूनियन व ऐक्टू के बैनर तले हजारों ग्राम प्रहरियों ने खुद को राज्य कर्मचारी घोषित किए जाने की मांग को लेकर इको गार्डन, लखनऊ पर धरना-प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को संबोधित 5-सूत्रीय मांग पत्र दिया. धरने से ग्राम प्रहरियों ने बिहार प्रांत की भांति राज्य कर्मचारी का दर्जा दो, दस लाख का दुर्घटना बीमा कराओ, बेगारी कराना बंद करो, डेढ हजार रुपये में दम नहीं - 18 हजार से कम नही, वर्दी मे बदलाव करो, आदि मांगें उठाईं. धरना को संबोधित करते हुए उ.प्र.

एड्स नियंत्रण कर्मियों का बिहार में राज्यव्यापी आंदोलन

समान काम के लिये समान वेतन के तहत लैब टेक्नीशियन व परामर्शी का मानदेय वृद्धि, सभी कर्मियों के लिये 4 लाख अनुग्रह अनुदान का लाभ, 01-04-’17 से बढ़े हुए दर पर देय एक वर्ष का प्रोत्साहन राशि का लाभ, 03-10-’13 से  31-10-’15 तक दो वर्ष का बकाया मानदेय वृद्धि का लाभ, सभी को ईपीएफ की सुविधा, मातृत्व लाभ आदि मांगें लागू करने के लिये बिहार राज्य एड्स नियंत्रण कर्मचारी संघ (संबद्ध ऐक्टू) के आहृान पर राज्य के हज़ारों एड्स नियंत्रण कर्मियों ने 26 नवंबर से आंदोलनरत रहते हुए अपने-अपने कार्यस्थलों पर काल बिल्ला/पट्टी बांधकर विरोध आंदोलन किया.

निर्माण मजदूरों का भागलपुर, बिहार में विशाल प्रदर्शन

बिहार की नितीश और केंद्र की मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों व मजदूरों के कल्याण योजना को लूट खाने की सरकारी साजिश के खिलाफ एवं मजदूरों के ऑनलाइन निबंधन करने की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने, ऑनलाइन के लिए जिला श्रम कार्यालय को तत्काल केंद्र बनाने, सभी निबंधित मजदूरों को बिना शर्त अनुदान राशि का भुगतान करने, सभी मजदूरों का निबंधन करने, श्रम कार्यालय में मजदूरों के साथ सम्मानजनक व्यवहार की गारंटी करने एवं मजदूरों के वाजिब काम में होने वाले विलम्ब के एवज में प्रत्येक दिन के लिए न्यूनतम मजदूरी के बराबर मुआवजे का भुगतान करने, आदि मांगों को लेकर 26 नवंबर को बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन (संबद

दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय के समक्ष भवन-निर्माण मजदूरों का प्रदर्शन

8 नवंबर 2018 को ऐक्टू से संबद्ध भवन-निर्माण मजदूर यूनियन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय के समक्ष प्रतिवाद किया और निर्माण क्षेत्र के सभी मजदूरों के लिए बेरोजगारी भत्ते की मांग की. इस प्रतिवाद में दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से श्रमिकों ने शिरकत की. दिल्ली में प्रदूषण के बारे में चल रहे शोर-शराबे के बीच दिल्ली के सबसे गरीब मजदूर - निर्माण क्षेत्र के दैनिक भोगी श्रमिक - पूरी तरह उपेक्षा के शिकार बन गए हैं. प्रदूषण के समाधान के लिए कदम उठाना जरूरी है, लेकिन सरकार और प्रशासन को इन कदमों से प्रभावित होने वाले कामगारों की बड़ी तादाद का भी जरूर खयाल रखना चाहिए.