धरना-प्रदर्शन-प्रतिरोध

कोयला लोडिंग मजदूरों का लाठी मार्च

रामगढ़ जिला में सीसीएल के अंतर्गत सिरका लोकल सेल में हाथ से कोयला लोडिंग बंद कर दिये जाने और पेलोडर से कोयला लोड की शुरूआत के विरोध में 500 लोडिंग मजदूरों ने 5 अक्टूबर को सिरका परियोजना पदाधिकारी के समक्ष आक्रोशपूर्ण लाठी मार्च किया और मजदूरों की मजदूरी की लूट तथा मजदूरों को बेरोजगार बनाने के खिलाफ आवाज उठाई.

कोयला उद्योग में जन-जागरण अभियान

ऐक्टू के राष्ट्रव्यापी जन जागरण अभियान के मद्देनजर सितंबर-अक्टूबर में कोयला उद्योग में अभियान चलाया गया. इस दौरान ईसीएल के मुगमा एरिया के हड़ियाजाम, श्यामपुर-बी, चांपापुर, लखीमाता कोलियरियों में गेट मीटिंग और आम सभा की गईं. यह कार्यक्रम बीसीसीएल के दहीबाड़ी कोलयरी में भी चलाया गया, वहां भी आम सभा की गई. इसी दौरान संयुक्त अभियान के तहत सीसीएल में रविवार और उसके बदले स्टगर्ड रेस्ट देने पर तथा मजदूरों को अन्यत्र स्थानान्तरण करने पर हरेक कोलयरी में सभा की गई और आन्दोलनात्मक कार्यक्रम चलाये गये. कोयला मजदूरों के अन्दर केन्द्र सरकार और कोल इंडिया प्रबन्धन के खिलाफ गुस्सा व्याप्त है.

‘जस्टिस फॉर जफर’ मंच ने निकाला प्रतिवाद मार्च

राजस्थान के प्रतापगढ़ में 8 अक्टूबर 2018 को ‘जस्टिस फॉर का. जफर मंच’ के बैनर तले नगर पालिका से जिला कलेक्टर तक एक मार्च निकालकर का. जफर को न्याय की मांग की गई. करीब 11.00 बजे प्रतापगढ़ शहर और जिले की विभिन्न तहसीलों से भाकपा-माले एवं ऐक्टू कार्यकर्ता और लोकतंत्र पसंद नागरिक नगर पालिका पर एकत्रित हुए और वहां से ‘का. जफर को न्याय दो, का.

बिहार में कस्तूरबा गांधी विद्यालय के सैकड़ों कर्मियों ने घेरा मुख्यालय

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की सैकड़ों कर्मियों द्वारा 25 अक्टूबर को अपने 10 सूत्री मांगों खासकर नियमितीकरण, मानदेय बढ़ोतरी, आदि के लिए पटना में बिहार शिक्षा परियोजना निदेशक के समक्ष जोरदार नारेबाजी के साथ प्रदर्शन करते हुए कार्यालय को ठप कर दिया. प्रदर्शन का आहृान ‘कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय एम्प्लाइज यूनियन (संबद्ध ऐक्टू) ने किया था. प्रदर्शन का नेतृत्व यूनियन की अध्यक्ष कुमारी विद्यावती सिंह ने किया. प्रदर्शनकारी महिलाओं का तेवर देख बाध्य होकर राज्य शिक्षा परियोजना निदेशक ने यूनियन प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया.

तमिलनाडु में ऐक्टू नेताओं का अनिश्चितकालीन अनशन

14 मई 2008 को ‘औद्योगिक रोजगार स्थायी आदेश अधिनियम’ में संशोधन कर इसे तमिलनाडु विधान सभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था. ‘सुमंगली योजना’, जहां प्रशिक्षुओं द्वारा ही 100 प्रतिशत उत्पादन किया जाता है, के खिलाफ उठी आवाजों के जवाब में सरकार ने यह कदम उठाया था. इस अधिनियम की धारा 10 ‘ए’ में प्रशिक्षु, बदली, अस्थायी और आकस्मिक मजदूरों के नियोजन और पुनर्नियोजन के प्रावधान हैं; जबकि धारा 10 ‘बी’ में किसी प्रतिष्ठान में स्थायी व अ-स्थायी श्रमिकों के प्रतिशत-निर्धारण की बात निहित है. बहरहाल, इस पर राष्ट्रपति की सहमति काफी देर से मिली - तर्क यह था कि इस संशोधन से निवेश पर बुरा असर पड़ेगा.

झारखंड में मिड-डे-मील कर्मियों का जुझारू संघर्ष जारी है

झारखण्ड प्रदेश विद्यालय रसोइया/संयोजिका/अध्यक्ष संघ ने अपनी 15-सूत्री मांगों को हासिल करने के लिये भाजपा-नीत रघुवर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है. उनकी मांगें हैं - बरखास्त किए गए सभी रसोइया और संयोजिकाओं को काम पर वापस लो, तमिलनाडु की तर्ज पर झारखण्ड में भी रसोइया-संयोजिका को चतुर्थ वर्गीय सरकारी कर्मचारी के रूप में बहाल करो, सभी रसोइया-संयोजिका को न्यूनतम वेतन 18,000रु.

सफल रही बिहार में रसोइयों की पांच दिवसीय हड़ताल

19 नवंबर को संसद के समक्ष संयुक्त प्रदर्शन को सफल करने का आहृान

‘बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ’ (संबद्ध ऐक्टू) के नेतृत्व में पांच दिवसीय हड़ताल (5-9 अक्टूबर 2018) को जबरदस्त सफलता मिली. स्वतःस्फूर्त रूप से रसोइयों ने इसमें भागीदारी की. हड़ताल की मुख्य मांगें थीं - रसोइयों को सरकारी कर्मचारी घोषित करो, जब तक सरकारी कर्मचारी घोषित नहीं होती हैं मानदेय 18000 रुपये करो; रसोइयों को बिहार सरकार की चौधरी कमेटी की सिफारिशों का लाभ दो; ईपीएपफ-ईएसआई का लाभ दो; पूरे साल के मानदेय का भुगतान किया जाए, मानदेय का भुगतान नियमित किया जाए; उन्हें पार्ट-टाइम वर्कर न कहा जाए आदि.

डीटीसी ठेका कर्मचारियों की ऐतिहासिक हड़ताल

वापस लेना पड़ा वेतन कटौती का सर्कुलर एस्मा को दरकिनार कर हज़ारों कर्मचारी हड़ताल में उतरे

ऐक्टू से सम्बद्ध ‘डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर’ द्वारा बुलाई गई और डीटीसी वर्कर्स यूनियन (एटक) एवं डीटीसी एम्प्लाइज कांग्रेस (इंटक) द्वारा समर्थित 29 अक्टूबर, 2018 को एक दिवसीय हड़ताल ने दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के पहियों को बुरी तरीके से जाम कर दिया. डीटीसी के ग्यारह हज़ार से ज्यादा ठेका कर्मचारियों और कई स्थाई कर्मचारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया.

शंकर गुहा नियोगी के शहादत दिवस पर रैली का आयोजन

28 सितंबर को छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (छमुमो) के नेता शहीद शंकर गुहा नियोगी के शहादत दिवस पर रेलवे स्टेशन दुर्ग से विशाल रैली निकली जो मालवीय चैक से जीई रोड होते हुए हुडको स्थित का0 नियोगी के शहादत स्थल पहुंची जहां झंडोत्तोलन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. तत्पश्चात हुडको के मैदान में बने पंडाल में एक बड़ी सभा आयोजित की गई.

उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन का जुझारू प्रदर्शन

ऐक्टू से संबद्ध ‘उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन’ ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा ‘‘आशाओं के साथ बात’’ कार्यक्रम के बाद की गई धोखाधड़ी भरी घोषणा के विरुद्ध 14 सितम्बर 2018 को राज्यव्यापी विरोध कार्यक्रम के तहत नैनीताल, रुद्रपुर, पिथौरागढ़, रानीखेत, भिकियासैंण, लोहाघाट, रामनगर, टनकपुर आदि अनेक स्थानों पर धरना-प्रदर्शन-जुलूस निकालकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा.